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Himachal News: बजट 2026 में आम आदमी को बंपर गिफ्ट, मगर सुक्खू सरकार को लगा 40 हजार करोड़ का झटका

Himachal News: बजट 2026 में मोबाइल, EV और जीवनरक्षक दवाएं सस्ती हुई हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश को बड़ी निराशा हाथ लगी है। 16वें वित्तायोग ने RDG ग्रांट की सिफारिश नहीं की, जिससे पहाड़ी राज्य को 40 हजार करोड़ का नुकसान होगा।
Himachal News: बजट 2026 में आम आदमी को बंपर गिफ्ट, मगर सुक्खू सरकार को लगा 40 हजार करोड़ का झटका
हिमाचल प्रदेश को नहीं मिलेगी राजस्व घाटा अनुदान (RDG) राशि, 16वें वित्तायोग का बड़ा झटका।
हाइलाइट्स
  • जानिए क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?
  • हिमाचल प्रदेश: उम्मीदों का पहाड़ और हाथ लगी निराशा
  • 40 हजार करोड़ का झटका, कैसे चलेगा राज्य?
  • सुक्खू सरकार के सामने अब क्या है रास्ता?

​शिमला:  रविवार का दिन देश के लिए मिला-जुला रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार का लगातार 9वां केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश किया। एक तरफ जहाँ आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए कई चीजों के दाम घटाए गए हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह बजट मायूसी लेकर आया है। सीतारमण ने अपने पिटारे से मोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और दवाओं को सस्ता करने का ऐलान किया, जिससे मिडिल क्लास के चेहरे खिल उठे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

जानिए क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?

अगर आप नया फोन या गाड़ी लेने की सोच रहे थे, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सरकार ने कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) में कटौती की है, जिससे लिथियम आयन सेल, मोबाइल बैटरियां, सोलर ग्लास और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सस्ते हो जाएंगे। इसके अलावा कैंसर और शुगर की 17 जीवनरक्षक दवाओं को ड्यूटी फ्री कर दिया गया है। आम आदमी के लिए कपड़े, लेदर के जूते और माइक्रोवेव ओवन खरीदना भी अब सस्ता होगा। यहाँ तक कि विदेश यात्रा और हवाई ईंधन के दाम भी कम होंगे। वहीं, जाम छलकाने वालों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे क्योंकि शराब पर टैक्स बढ़ा दिया गया है।

हिमाचल प्रदेश: उम्मीदों का पहाड़ और हाथ लगी निराशा

दिल्ली से हिमाचल के लिए जो खबर आई है, उसने सुक्खू सरकार की नींद उड़ा दी है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को इस बजट से विशेष राहत पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन राहत तो दूर, पुराना सहारा भी छीन लिया गया है। दरअसल, 16वें वित्तायोग ने हिमाचल समेत छोटे राज्यों को दी जाने वाली राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी (RDG Grant) देने की सिफारिश नहीं की है। यह फैसला प्रदेश की आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि राज्य पहले से ही भारी कर्ज और आपदाओं की मार झेल रहा है।

40 हजार करोड़ का झटका, कैसे चलेगा राज्य?

आंकड़ों पर नजर डालें तो यह झटका बहुत बड़ा है। 15वें वित्तायोग के दौरान हिमाचल को आरडीजी के रूप में 35 से 40 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जिससे राज्य के कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और विकास कार्य चलते थे। अब इस आर्थिक सहायता (Financial Aid) के बंद होने से राज्य को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती का सीधा असर राज्य की विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर पड़ेगा।

सुक्खू सरकार के सामने अब क्या है रास्ता?

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को उम्मीद थी कि बजट में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए और कर्ज से राहत पाने के लिए केंद्र कोई विशेष घोषणा करेगा। लेकिन बजट भाषण खत्म होते ही हिमाचल के हाथ खाली रह गए। हालांकि बजट में कुछ राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं का जिक्र है, लेकिन हिमाचल की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों (Geographical Conditions) के लिए कोई अलग पैकेज नहीं मिला। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस भारी-भरकम वित्तीय घाटे की भरपाई कैसे करती है, क्योंकि आरडीजी के बिना गाड़ी खींचना बेहद मुश्किल होने वाला है।

इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार और वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल के लिए चार प्रमुख मुद्दे उठाए थे। इनमें

  • राजस्व घाटा अनुदान में बढ़ोतरी
    सीएम ने मांग की कि हिमाचल को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये सालाना का राजस्व घाटा अनुदान दिया जाए, ताकि राज्य पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम किया जा सके।
  •  पहाड़ी राज्यों के लिए अलग ग्रीन फंड
    हिमालयी राज्यों की पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को देखते हुए सीएम ने 50,000 करोड़ रुपये सालाना का ग्रीन फंड बनाने की मांग की, जिससे हरित विकास, जंगल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़े कार्यों को गति मिल सके।
  • आपदा राहत के लिए विशेष प्रावधान
    हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। सीएम ने बजट में डिजास्टर रिस्क इंडेक्स को अलग से परिभाषित करने और आपदा प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधन देने की मांग रखी।
  • लोन लिमिट में छूट की मांग
    राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अतिरिक्त 2 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया, ताकि विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों को रफ्तार मिल सके।

हालांकि, बजट 2026 में इन मांगों पर कोई स्पष्ट और ठोस घोषणा नहीं होने से प्रदेश सरकार और आम जनता में मायूसी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरडीजी ग्रांट जैसी सहायता नहीं मिली तो हिमाचल को आने वाले वर्षों में विकास कार्यों में कटौती और वित्तीय प्रबंधन में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 हिमाचल प्रदेश के लिए उम्मीदों से कम और चुनौतियों से भरा साबित हुआ है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और वित्त आयोग के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या भविष्य में छोटे राज्यों को कोई विशेष राहत दी जाएगी या नहीं।

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Web Title: Budget 2026 cheaper dearer list himachal pradesh rdg grant loss analysis