शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार (Sukhu government of Himachal Pradesh) ने सरकारी कर्मचारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड (General Provident Fund) और अन्य समान फंड्स पर ब्याज दरों की घोषणा की है। राज्य के वित्त विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि जीपीएफ और इसी तरह की बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार (Principal Secretary, Finance Department, Devesh Kumar) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 1 जुलाई 2024 से 30 सितंबर 2024 तक जीपीएफ पर ब्याज दर 7.1 प्रतिशत होगी। यह निर्णय सभी सरकारी कर्मचारियों (Government employees) के लिए राहत भरा है क्योंकि उनकी जीपीएफ में जमा राशि (Amount deposited in GPF) पर इसी दर से ब्याज मिलेगा। यह सूचना सरकारी गजट में प्रकाशित की गई है ताकि इसे सभी संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचाया जा सके।
सुक्खू सरकार ने अपने आदेश में प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative Officers) को निर्देश दिया है कि वे इस ब्याज दर की जानकारी कर्मचारियों को तुरंत दें। इससे कर्मचारियों को अपनी बचत और ब्याज के अनुमान को समझने में आसानी होगी। यह कदम न केवल कर्मचारियों को जागरूक करेगा बल्कि उन्हें अपने वित्तीय निर्णयों को बेहतर तरीके से लेने में भी मदद करेगा।
जीपीएफ की ब्याज दरों में पिछले कुछ वर्षों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
यह गिरावट आर्थिक परिस्थितियों (Economic Circumstances) राज्य की माली हालत और अन्य वित्तीय कारकों के कारण आई है। हालांकि, कर्मचारियों के लिए 7.1% की ब्याज दर मौजूदा समय में एक स्थिर और भरोसेमंद आय का जरिया है। जनरल प्रोविडेंट फंड (General Provident Fund) सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बचत योजना है। इसमें कर्मचारियों का नियमित योगदान होता है, जो उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
हिमाचल प्रदेश में करीब दो लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जो नियमित रूप से जीपीएफ में योगदान करते हैं। ऐसे में 7.1% की ब्याज दर से इन कर्मचारियों को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में राहत मिलेगी। बढ़ती महंगाई और राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह ब्याज दर एक स्थिर आय का जरिया बनेगी।