Himachal Budget 2026-27: सुक्खू सरकार का 54,928 करोड़ का बजट; दूध के दामों में 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी, सदन में भारी हंगामे के बीच बड़ी घोषणाएं
Himachal Budget 2026-27: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर रहे हैं। प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच यह बजट खास रहेगा। सीएम के विपक्ष पर टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष के लगातार हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवावही 11:30 बजे तक स्थगित कर दी। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने एंट्री टैक्स बढ़ाए जाने के खिलाफ विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी की। जब मुख्यमंत्री ने बजट भाषण शुरू किया, तो राज्य की खस्ता आर्थिक स्थिति और 16वें वित्त आयोग की ग्रांट बंद होने का जिक्र करते हुए विपक्ष को घेरा, जिससे नाराज भाजपा विधायक वेल तक पहुंच गए और सदन को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा।
पशुपालकों की चांदी: दूध की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मुख्यमंत्री सुक्खू ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। उन्होंने पशुपालकों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए गाय के दूध की खरीद कीमत 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर कर दी है। इसी तरह, भैंस के दूध के दाम भी 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस 10 रुपये की सीधी बढ़ोतरी का सबसे बड़ा लाभ गांव की उन महिलाओं को मिलेगा जो डेयरी व्यवसाय से जुड़ी हैं। यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की एक बड़ी गारंटी के रूप में देखा जा रहा है।
बागवानों की चिंता और चुनावी गारंटियों पर अडिग सरकार
सेब बागवानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की ‘ट्रेड डील’ और आयात शुल्क (Import Duty) नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विदेशी सेबों पर रियायत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगी, जो किसानों के साथ सरासर नाइंसाफी है। अपनी बात के अंत में मुख्यमंत्री ने कविता के जरिए विपक्ष पर तंज कसा और भरोसा दिलाया कि संसाधनों की कमी के बावजूद सरकार अपनी सभी 10 गारंटियों को पूरा करेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने कड़े फैसलों से पीछे नहीं हटेगी क्योंकि ये राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी हैं।
कर्ज का जाल और केंद्र पर ‘अन्याय’ का आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में हिमाचल की तुलना उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों से करते हुए कहा कि हिमाचल अभी अपनी कमाई से खर्च चलाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें आरडीजी के 47,000 करोड़ और जीएसटी मुआवजे के 13,000 करोड़ मिले थे, लेकिन उन्होंने कर्ज चुकाने के बजाय फिजूलखर्ची की। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से हिमाचल को अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है, जिससे राज्य ‘डेट ट्रैप’ (कर्ज के जाल) की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने व्यर्थ के संस्थानों को बंद करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
बजट के आकार में कटौती, पर विकास कार्यों को 500 करोड़
इस साल का कुल बजट 54,928 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले साल के 58,514 करोड़ रुपये के मुकाबले 3,586 करोड़ रुपये कम है। बजट में कमी के बावजूद सीएम ने आश्वासन दिया कि जनहित के कार्यों में कटौती नहीं होगी। सरकार ने पिछले काफी समय से लंबित पड़े 300 विकास कार्यों को गति देने के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष बजट रखा है। सीएम ने कहा कि हमारी प्राथमिकता रुकी हुई योजनाओं को मुकाम तक पहुंचाना है ताकि जनता को उनका लाभ जल्द मिल सके।
