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Pangi Unaudi Mela: पांगी की करयास पंचायत में तीन दिवसीय उनौडी मेले का आगाज, साच पास खुलने से जुड़ा है इस मंदिर का गहरा रहस्य

Pangi Unaudi Mela:  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी में पारंपरिक उनौडी मेले की धूम शुरू हो गई है। करयास पंचायत में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय उत्सव मां वालिन वासनी को समर्पित है। 
Pangi Unaudi Mela
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Pangi Unaudi Mela: पांगी:  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी की संस्कृति अपनी अनूठी परंपराओं और लोक मान्यताओं के लिए जानी जाती है। वहीं वीरवार को पांगी की करयास पंचायत में तीन दिवसीय ऐतिहासिक उनौडी मेले का आगाज हो गया। हुगाल गांव स्थित मेला पंडाल में मंदिर के पुजारियों और कारदारों ने मां वालिन वासनी की विशेष पूजा-अर्चना कर इस उत्सव का शुभारंभ किया। अगले तीन दिनों तक पूरी पंचायत भक्ति और उल्लास के रंग में डूबी रहेगी। यह तीन दिवसीय मेला मुख्य रूप से मां वालिन वासनी और टटन माता को समर्पित है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन तीन दिनों में माता की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस मेले के समापन के बाद बैसाखी के अवसर पर मां वालिन वासनी माता के मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इन कपाटों के खुलने का इंतजार न केवल श्रद्धालु करते हैं, बल्कि लोक निर्माण विभाग भी करता है, क्योंकि इसी के बाद क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण सचे जोत सड़क को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होती है।

सचे जोत से एक बेहद दिलचस्प और डरावनी लोक मान्यता भी जुड़ी हुई है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि जब तक मां वालिन वासनी के मंदिर के कपाट नहीं खुलते, तब तक सचे जोत में स्थित भूत ग्राउंड में राक्षसों का राज रहता है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति इस दर्रे की ओर जाने की हिम्मत नहीं करता है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद ही यह माना जाता है कि दैवीय शक्तियों ने मार्ग को सुरक्षित कर दिया है, जिसके बाद ही मार्ग बहाली के लिए मशीनरी कूच करती है।

मेले के दौरान पूरी प्रजा मंडल में भारी उत्साह देखा जा रहा है। उत्सव के आकर्षण का केंद्र परघवाल का रथयात्रा होती है, जो विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए मेला स्थल पहुंचती है। कल यानी शुक्रवार को इस मेले का मुख्य आयोजन होगा, जिसमें पांगी घाटी की सुख-समृद्धि और शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इन दिनों करयास पंचायत के हर घर में मेहमानों का तांता लगा रहता है।  इस मेले में  करयास पंचायत की जो बेटियां शादी के बाद दूर-दराज के क्षेत्रों में जा बसी हैं, वे इस मेले के दौरान अपने मायके आती हैं। बेटियां अपने माता-पिता और कुल देवी का आशीर्वाद लेती हैं। यह मिलन न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूती देता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से रूबरू कराने का एक बड़ा जरिया भी बनता है।

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Web Title: Pangi unaudi mela karyas panchayat tradition sach pass opening
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