EPFO PF Account : नई दिल्ली: भारत में नौकरीपेशा लोगों के पास पीएफ अकाउंट (Provident Fund Account) होता है, जिसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) मैनेज करता है। यह अकाउंट एक बचत योजना (Savings Plan) की तरह काम करता है, जिसमें कर्मचारी और कंपनी (Employee and company) दोनों का योगदान होता है। हर महीने कर्मचारी के वेतन का 12% हिस्सा PF Account (PF Account) में जमा होता है, और कंपनी भी इतनी ही राशि इसमें जमा करती है।
कर्मचारी की पेंशन (Employee's pension) के लिए पीएफ अकाउंट (PF Account) में जमा राशि का एक हिस्सा आरक्षित है। EPFO नियमों के अनुसार, एक कर्मचारी 10 साल तक पीएफ में लगातार योगदान कर सकता है। लेकिन आपको पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा अगर आप PF Account से पूरी रकम निकाल लेते हैं। आइए, इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियमों को समझें।
जैसा कि हमने पहले बताया, कंपनी और एम्प्लॉई दोनों PF Account में कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं। कर्मचारी की सैलरी का 12% पीएफ अकाउंट में जाता है और कंपनी भी 12% का योगदान करती है। 8.33 प्रतिशत (कम्पनी के 12 प्रतिशत कॉन्ट्रीब्यूशन) सीधे EPS फंड (Employee Pension Scheme Fund) में जाता है। और बाकी का 3.67% PF Account में जाएगा।
10 साल तक पीएफ अकाउंट होल्डर पेंशन का हकदार होगा। यानी अगर कर्मचारी ने 10 साल तक अपने PF Account में नामांकन किया है, तो वह पेंशन का हकदार है, चाहे वह इसके बाद नौकरी छोड़ दे या बदल दे।पेंशन पाने के लिए कर्मचारी कुछ शर्तों को पूरा करना चाहिए। ऐसे
अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल तक PF Account में कॉन्ट्रीब्यूट किया और बाद में नौकरी छोड़ दी, तो कर्मचारी को अपना EPS फंड एक्टिव रखना होगा ताकि वे पेंशन का बेनिफिट पा सकें। अगर कर्मचारी जरूरत पड़ने पर अपने PF Account से पूरा पैसा निकाल लेता है लेकिन उसका EPS फंड बरकरार है, तो उसे पेंशन मिलेगी। लेकिन अगर वह अपने EPS फंड का पूरा पैसा भी निकाल लेता है, तो उसे पेंशन नहीं मिलेगी।इसलिए, अगर आपको पेंशन बेनिफिट चाहिए, तो EPS फंड को नहीं निकालना चाहिए।
EPFO नियमों के अनुसार, एक कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद पेंशन पा सकता है अगर वह 10 साल तक लगातार PF Account में कॉन्ट्रीब्यूट करता है। अगर वह अपने EPS फंड को नहीं निकाला है।