शिमला: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य में युवाओं को रोजगार देने के अपने वादे को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Chief Minister Sukhwinder Singh Sukhu) के नेतृत्व में सरकार ने प्रदेश में 5,000 युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने का योजना तैयार की है। यह योजना आईटी सेक्टर में रोजगार (jobs in it sector) के अवसरों पर केंद्रित है, जिसके तहत हिमाचल में Semiconductor उद्योग स्थापित किए जाएंगे। सरकारी स्तर पर इसको लेकर मंथन शुरू हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश में Semiconductor निर्माण की कंपनियों ने मुख्यमंत्री सुक्खू के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें प्रदेश में अपने उद्योग स्थापित करने की इच्छा जाहिर की गई है। सीएम सुक्खू ने इन प्रस्तावों को गंभीरता से लेते हुए सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस दिशा में रोडमैप तैयार करें। Semiconductor उद्योगों के आने से राज्य के युवाओं के लिए आईटी सेक्टर में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
सरकार का मानना है कि Semiconductor उद्योगों की स्थापना से राज्य के युवाओं में आईटी सेक्टर में करियर बनाने की रुचि बढ़ेगी। पहले चरण में, करीब एक हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और पांच हजार युवाओं को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रस्ताव के लिए रोडमैप बनाएं। विभागीय अधिकारी इन कंपनियों से संपर्क स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं के अनुसार रोडमैप तैयार करने में जुट गए हैं।
हिमाचल सरकार ने आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही कई प्रयास शुरू कर दिए हैं। राजकीय हाइड्रो इंजीनियरिंग महाविद्यालय बंदला में कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग (Computer Science and Engineering) के तहत एआई और डेटा साइंस, राजकीय बहुतकनीकी संस्थान रोहड़ू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग, और चंबा में मेकाट्रोनिक्स डिप्लोमा जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षकों को भी रोबोटिक्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे छात्रों को बेहतर शिक्षा दे सकें।
कांग्रेस सरकार ने चुनाव के दौरान युवाओं को 5 लाख नौकरियां देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में दो साल होने के बावजूद यह वादा पूरी तरह से नहीं निभाया जा सका है। इस कारण युवाओं में सरकार के प्रति नाराज़गी बढ़ रही है। युवाओं का कहना है कि उम्र बढ़ने के कारण उनकी सरकारी नौकरी पाने की संभावनाएं कम हो रही हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।