Sahara India Money Refund : सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशाें बाद, हारा में फंसे हुए पैसे वालों के लिए बड़ी राहत
Sahara India Money Refund :सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिससे उन निवेशकों को राहत मिल सकती है जिनका पैसा सहारा ग्रुप में फंसा हुआ है। अदालत ने सहारा ग्रुप को आदेश दिया है कि वह अपनी संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाए।
Sahara India Money Refund : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिससे उन निवेशकों (investors) को राहत मिल सकती है जिनका पैसा सहारा ग्रुप (Sahara Group) में फंसा हुआ है। अदालत ने सहारा ग्रुप (Sahara Group) को आदेश दिया है कि वह अपनी संपत्तियों (properties) को बेचकर निवेशकों (investors) का पैसा लौटाए।
क्या है अदालत का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि सहारा ग्रुप (Sahara Group) को अपनी संपत्तियों (properties) की सूची और योजना (list and plan) पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पेश करनी होगी। इसके अलावा, अदालत ने साफ किया है कि सहारा समूह (Sahara Group) अपनी एसेट्स को बेच सकता है, ताकि वह सेबी-सहारा रिफंड (SEBI-Sahara Refund) खाते में लगभग ₹10,000 करोड़ रुपये जमा कर सके।
क्या होगा इस पैसे का इस्तेमाल?
इस पैसे का इस्तेमाल निवेशकों (investors) का पैसा लौटाने के लिए किया जाएगा। अदालत ने सहारा समूह (Sahara Group) से एक योजना पेश (present the plan) करने के लिए कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि बिना बंधक वाली एसेट्स को कैसे बेचा जाएगा ताकि आवश्यक रकम जुटाई जा सके। सुप्रीम कोर्ट की पीठ जस्टिस संजीव खन्ना (Supreme Court bench Justice Sanjeev Khanna) की अध्यक्षता में निर्णय दिया कि सहारा समूह (Sahara Group) अपनी एसेट्स को बेच सकता है। लेकिन उन्हें सर्कल दर से 10% कम पर बेचना होगा। समूह को अदालत से अनुमति लेनी होगी अगर वे इससे भी कम कीमत पर बेचना चाहते हैं। अदालत ने पारदर्शिता पर जोर दिया। जस्टिस एम.एम. सुंदरश और बेला एम. त्रिवेदी (Justice M.M. Sundarash and Bela M. Trivedi) की पीठ ने सहारा समूह (Sahara Group) को बिना बंधक वाली एसेट्स की सूची देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने पारदर्शिता और जवाबदेही (Transparency and Accountability) सुनिश्चित करने के लिए सेबी को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के आदेश से संबंधित है, जिसमें सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Sahara India Real Estate Corporation LimitedL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Sahara India Real Estate Corporation Limited) को तीन महीने के भीतर निवेशकों से जमा किया गया धन पर 15% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया था। दस वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी सहारा समूह (Sahara Group) ने इस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया है। सेबी (SEBI) ने बताया कि सहारा की सभी एसेट्स बिना बंधक की नहीं हैं और भुगतान (Payment) की समय पर चिंता जताई। इस पर कोर्ट ने समूह से 10,000 करोड़ रुपये जमा करने की योजना और बेचने योग्य शेयरों (eligible shares) की सूची पेश करने को कहा।
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