Chamba Pangi News: राज्यसभा में गूंजा चहैंणी पास टनल का मुद्दा, हर्ष महाजन ने में उठाया पंगवाल समूदाय का अहम मुद्दा
Chamba Pangi News: पत्रिका न्यूज सर्विस (शिमला) हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दुर्गम पांगी घाटी के लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद जगी है। भाजपा के दिग्गज नेता और सांसद हर्ष महाजन ने शून्यकाल के दौरान Pangi Valley Connectivity के मुद्दे को मजबूती से देश की राज्यसभा (Rajya Sabha) में उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि यह जनजातीय बहुल इलाका आज भी आधुनिक युग में साल के करीब 8 महीने देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कटा रहता है। 25 हजार से ज्यादा लोगों को हर साल भारी बर्फबारी के कारण अलगाव जैसी सजा काटनी पड़ती है, जिससे उनकी शिक्षा, सेहत और बुनियादी सुविधाओं पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
चहैंणी पास टनल पांगी के विकास का नया द्वार
सांसद ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि चंबा-किलाड़ सड़क को हर मौसम के अनुकूल बनाना अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि वक्त की मांग है। उन्होंने करीब 8.5 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित चहैंणी पास टनल के निर्माण को इस भौगोलिक समस्या का अंतिम हल बताया। हर्ष महाजन का मानना है कि यदि यह सुरंग हकीकत बनती है, तो चंबा के जनजातीय समाज का सर्वांगीण विकास (Development) नई ऊंचाइयों को छुएगा। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन सुगम होगा, बल्कि खूबसूरत पांगी घाटी में पर्यटन की अपार संभावनाएं भी खुलेंगी, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगी।
सामरिक महत्व: लेह और कारगिल तक आसान पहुंच
इस परियोजना की अहमियत केवल आम नागरिकों की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक Strategic Defense Route के तौर पर देश के लिए गेमचेंजर साबित होगी। हर्ष महाजन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा (Security) के लिहाज से चंबा-लेह कॉरिडोर का निर्माण अति आवश्यक है। वर्तमान में एनएच 154A पठानकोट को चंबा से जोड़ता है, लेकिन लेह की ओर जाने वाला 52 किलोमीटर का लिंक लिंक अभी भी अधूरा है। अगर यह लिंक पूरा हो जाता है, तो पठानकोट कैंट जैसे महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र से बॉर्डर तक पहुंचने का रास्ता बहुत छोटा और सुरक्षित हो जाएगा।
BRO को जिम्मेदारी सौंपने का आग्रह
आंकड़ों पर गौर करें तो इस मार्ग के बनने के बाद पठानकोट से लेह की दूरी 800 किलोमीटर से घटकर महज 450 किलोमीटर रह जाएगी। सांसद ने केंद्र सरकार से पुरजोर आग्रह किया कि इस पूरे प्रोजेक्ट का जिम्मा Border Roads Organization को सौंपा जाए ताकि निर्माण में तेजी आए और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इस कॉरिडोर के तैयार होने से मनाली-लेह मार्ग पर सेना की निर्भरता कम होगी और भविष्य में किसी भी संकट के दौरान रक्षा मंत्रालय व स्थानीय प्रशासन (Administration) को रसद आपूर्ति व मेडिकल इवैक्यूएशन में अभूतपूर्व मदद मिलेगी।