RBI MPC Meeting 2026 Updates: RBI ने अभी-अभी कर दिया बड़ा ऐलान, 2026 की पहली पॉलिसी में रेपो रेट जस का तस
RBI MPC Meeting 2026 Updates: भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर देश के करोड़ों कर्जदारों और आम आदमी को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को हुई RBI Monetary Policy की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एलान किया कि नीतिगत दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। केंद्रीय बैंक (Central Bank) ने रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि बाजार में नकदी का प्रवाह और ब्याज दरें पहले से ही संतुलित स्थिति में हैं। यदि आप अपना घर बनाने या नई कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सुकून भरी है।
रेपो रेट में बदलाव क्यों नहीं और क्या है इजिंग साइकिल?
गवर्नर ने साफ किया कि आरबीआई इस समय मॉनेटरी इजिंग साइकिल के दौर से गुजर रहा है, जिसके तहत केंद्रीय बैंक अब तक कुल 1.25% की कटौती कर चुका है। इसी वजह से Repo Rate को दोबारा न छेड़ने का निर्णय लिया गया ताकि पुरानी कटौतियों का फायदा पूरी तरह से ग्राहकों तक पहुंच सके। बैंक का मानना है कि वर्तमान ब्याज दरें न केवल महंगाई को काबू में रखने के लिए पर्याप्त हैं, बल्कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए भी सही हैं। इससे विभिन्न प्रकार के कर्ज (Loans) लेने वाले लोगों की मासिक किस्तों में भारी उछाल आने की आशंका खत्म हो गई है।
महंगाई के मोर्चे पर राहत और आम जनता को सुकून
रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरें स्थिर रखने का सबसे बड़ा हथियार महंगाई का काबू में होना है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, CPI Inflation अक्टूबर 2025 में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जिसने नीति नियंताओं को सोचने का एक नया मौका दिया। जब उपभोक्ता मूल्य (Consumer Price) सूचकांक नियंत्रण में रहता है, तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की जल्दबाजी नहीं रहती। यही वजह है कि फिलहाल आपकी रसोई के बजट पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और बाजार में कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।

जीडीपी ग्रोथ: रॉकेट की रफ्तार से दौड़ रहा है भारत
आर्थिक विकास के मामले में भारत दुनिया के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है। आरबीआई के अनुमानों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7% से अधिक की दर से बढ़ने के लिए तैयार है। GDP Growth के मोर्चे पर गवर्नर ने नई उम्मीदें जगाते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए अनुमान बढ़ाकर 6.9% कर दिया गया है। देश के भीतर बढ़ती आर्थिक गतिविधि (Economic Activity) और बजट के दौरान लिए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फैसलों ने इस भरोसे को और मजबूती प्रदान की है।
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदों का नया सवेरा
हालांकि अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। Monetary Policy Committee ने आगाह किया है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव और ट्रेड पैटर्न में हो रहे बदलाव जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद, रबी फसलों की मजबूत बुवाई और जलाशयों में पानी का बेहतर स्तर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगा। निजी निवेश (Investment) में आ रही तेजी और कॉरपोरेट सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन से उम्मीद है कि 2026 में भी भारतीय बाजार अपनी चमक बरकरार रखेगा।