Success Story: 50 लाख की नौकरी छोड़ शुरू किया ऐसा बिजनेस, अब 5 करोड़ का है टर्नओवर, युवाओं के लिए मिसाल बनी साकेत की कहानी
Success Story: आज के इस दौर में हर कोई युवा सरकारी नौकरी की दौड़ में अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देता है लेकिन फिर भी उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलती है। लेकिन आज हम आपको गुड़गांव के रहने वाले 33 साल के संकेत सौरभ की कहानी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी 50 लाख की सालाना नौकरी को छोड़कर सड़क के किनारे एक ऐसा बिजनेस शुरू किया जिसके माध्यम से आज पूरी एक नेशनल ब्रांड के रूप में अपनी स्टेट फूड की कंपनी स्थापित करने में सफलता हासिल की हुई है। इस कहानी पर आपको यकीन करना मुश्किल होगा लेकिन यह एक सच्ची घटना है संकेत सौरभ गुड़गांव के रहने वाले हैं उन्होंने अपनी शानदार 50 लाख की सालाना नौकरी को ठोकर मार कर सड़क के किनारे मोमोज बेचने का काम शुरू किया। सौरव ने अपने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य दुकान खोलना नहीं था बल्कि लोकप्रिय स्ट्रीट फूड को एक नेशनल ब्रांड के रूप में स्थापित करना उनका लक्ष्य था आज उनका यह बिजनेस दम मोमोज माफिया के नाम पर पूरे भारत में मशहूर है जिसने साबित कर दिया कि अगर विजन उनका स्पष्ट हो तो कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है।
चुनौतियों से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
CSR मॉडल: रेहड़ी से रेस्टोरेंट तक की उड़ान
गुड़गांव के रहने वाले 33 साल के साकेत सौरभ की कहानी आज के युवाओं के लिए किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने अपनी शानदार ₹50 लाख सालाना की Corporate Career को दांव पर लगाकर मोमोज बेचने का साहसी फैसला किया। साकेत का मुख्य उद्देश्य केवल एक दुकान खोलना नहीं, बल्कि इस लोकप्रिय स्ट्रीट फूड को एक नेशनल ब्रांड के रूप में स्थापित करना था। आज उनका यह व्यापार (Business) ‘द मोमोज माफिया’ के नाम से देशभर में मशहूर हो रहा है, जिसने साबित कर दिया कि अगर विजन स्पष्ट हो, तो कोई भी काम छोटा नहीं होता।
मुश्किलों से सबक लेते हुए साकेत ने अपने काम करने के तरीके को बदला और एक नया Business Model तैयार किया। उन्होंने प्रॉपर दुकानों के बाहर व्यवस्थित कार्ट लगाना शुरू किया, जिसे उन्होंने सीएसआर यानी ‘कार्ट सर्विस रेस्टोरेंट’ (Cart Service Restaurant) का नाम दिया। आज उनके पास करीब 40 कार्ट और 20 से ज्यादा छोटे आउटलेट्स हैं, जो शहर के कोने-कोने में अपनी पहचान बना चुके हैं। इस स्मार्ट रणनीति की वजह से उनके काम में न केवल स्थिरता आई, बल्कि उनका वार्षिक मुनाफा (Profit) भी तेजी से बढ़ने लगा।
कमाई के आंकड़े और भविष्य का लक्ष्य
साकेत की मेहनत का ही नतीजा है कि महज ढाई साल के भीतर उनकी कंपनी ने ₹5 करोड़ से ज्यादा का Annual Turnover दर्ज किया है। पहले साल जहाँ कुल कमाई महज ₹16 लाख थी, वहीं साल 2024 में यह बढ़कर ₹2.2 करोड़ तक पहुँच गई। अब साकेत हर उस युवा उद्यमी (Entrepreneur) को सलाह देते हैं जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है। उनका साफ कहना है कि स्टॉल से शुरुआत करना तो ठीक है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड आउटलेट खोलना ही सफलता की असली चाबी है।