Jio को भारी पड़ा झूठा वादा, अनलिमिटेड डेटा के नाम पर कोर्ट ने लगाई क्लास और ठोंका जुर्माना
- रिफंड के लिए काटने पड़े चक्कर
- जेब से भरने होंगे एक्स्ट्रा पैसे
नई दिल्ली: रिलायंस जियो (Reliance Jio) के साथ एक ग्राहक ने कंपनी को ऐसा आढे हाथ लिया कि कंपनी को भी याद रखना पड़ा। दरसल सुशील कुमार अग्रवाल नाम के एक शख्स ने पूरे साल का पैसा एक साथ देकर घर पर ब्रॉडबैंड लगवाया। उन्होंने सोचा था कि एक बार पैसे दे दिए तो अब साल भर इंटरनेट की छुट्टी हो जाएगी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि कंपनी वायर्ड के नाम पर उन्हें वायरलेस कनेक्शन चिपका देगी। जब 18 दिन बाद ही डेटा खत्म होने का मैसेज आया तब जाकर इस पूरे मामले की पोल खुली।
सुशील ने 13 मार्च 2024 को यह कनेक्शन लिया था और इसके लिए एडवांस में ₹12,729 जमा कर दिए। अगले दिन कनेक्शन (Broadband Connection) लग भी गया। लेकिन जब उन्होंने देखा कि यह तारों वाला नहीं बल्कि वायरलेस है, तो उन्होंने तुरंत आपत्ति जताई। उस वक्त जियो वालों ने उन्हें भरोसा दिया कि यह वायरलेस होते हुए भी वायर्ड जैसा ही चलेगा और इसमें अनलिमिटेड डेटा मिलेगा। लेकिन कंपनी का यह दावा झूठा निकला और कुछ ही दिनों में इंटरनेट बंद हो गया।
रिफंड के लिए काटने पड़े चक्कर
परेशान होकर ग्राहक ने 3 अप्रैल को कनेक्शन कटवाने की ठान ली। उन्होंने कई बार फोन किए, ईमेल भेजे और लिखित आवेदन भी दिए। कंपनी ने अपनी डिवाइस तो वापस मंगवा ली और पैसा वापसी (Refund Process) का वादा भी कर दिया। लेकिन हकीकत में सुशील को उनके पैसे वापस नहीं मिले। वो इंतजार करते रहे, लेकिन कंपनी की तरफ से टालमटोल जारी रही। थक-हारकर उन्होंने अपने हक के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया, क्योंकि कंपनी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थी।
अदालत में जब सुनवाई हुई, तो जियो की तरफ से कोई पेश ही नहीं हुआ। ऐसे में मामला एकतरफा चला। उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) ने सारे सबूत देखने के बाद माना कि यह सरासर सेवा में कमी है और गलत तरीके से व्यापार किया गया है। जज ने जियो को सख्त आदेश दिया कि ग्राहक के पूरे ₹12,729 वापस किए जाएं, वो भी 9% ब्याज के साथ। यानी कंपनी को अब मूल रकम से ज्यादा पैसे लौटाने होंगे।
जेब से भरने होंगे एक्स्ट्रा पैसे
बात सिर्फ रिफंड तक नहीं रुकी। कोर्ट ने ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और केस लड़ने में हुए खर्च को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने जियो पर अतिरिक्त जुर्माना लगाते हुए कहा कि उसे मुआवजा (Compensation Amount) के तौर पर 7,000 रुपये और देने होंगे। यह फैसला उन कंपनियों के लिए एक बड़ा सबक है जो ग्राहकों को तकनीकी शब्दों के जाल में फंसाकर गलत प्रोडक्ट बेचती हैं और बाद में अपनी जिम्मेदारी से भागती हैं।
