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Himachal News: नन्हीं बेटियों ने गुल्लक तोड़कर आपदा राहत कोष में किया दान, CM सुक्खू ने जताया आभार

Himachal News ​शिमला:  बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, ऐसा कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में अब तक 180 करोड़ रुपये की धनराशि ऐसे ही छोटे-छोटे पैसे से जमा हो चुकी है। शिमला की दो नन्हीं बेटियां रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को राहत कोष में दान देने के लिए मिलीं। इन बेटियों ने…
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  • Himachal News ​शिमला:  बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, ऐसा कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में अब तक 180 करोड़ रुपये की धनराशि ऐसे ही छोटे-छोटे पैसे से जमा हो चुकी है।

Himachal News ​शिमला:  बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, ऐसा कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में अब तक 180 करोड़ रुपये की धनराशि ऐसे ही छोटे-छोटे पैसे से जमा हो चुकी है।

शिमला की दो नन्हीं बेटियां रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को राहत कोष में दान देने के लिए मिलीं। इन बेटियों ने मुख्यमंत्री को अपना गुल्लक दे दिया। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली अहाना वर्मा ने 10 हजार 229 रुपये और दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली जिया वर्मा ने 9 हजार 806 रुपये प्राप्त किए हैं, जो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सौंपा गया था। दान छोटा है, लेकिन लक्ष्य बड़ा है। हिमाचल प्रदेश में आपदा ने 8667.95 करोड़ रुपये का नुकसान किया है और 441 लोग मारे गए हैं। इस बीच, हिमाचल प्रदेश की सरकार को अन्य राज्यों की सरकारें भी मदद कर रही हैं, साथ ही उसके बच्चों और बुजुर्ग भी।

CM सुक्खू की मां भी दान कर चुकी हैं
हिमाचल प्रदेश में आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य के लिए सरकार को बहुत सारी राशि चाहिए। इस बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने निजी खातों से मुख्यमंत्री आपदा राहत को 51 लाख रुपये दिए हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की माता संसार देवी ने भी 50 हजार रुपये आपदा राहत कोष में अपनी निजी बचत से दिए। मुख्यमंत्री ने इन दोनों बेटियों के इस अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चे भी इस अच्छे काम में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और आपदा प्रभावित लोगों की परेशानियों को कम करने में अपना योगदान दे रहे हैं। उनका कहना था कि हिमाचल प्रदेश के लोगों की संवेदनशीलता इन नन्हीं बेटियों के इस प्रयास से दिखाई देती है। उनका कहना था कि पूरे समाज को यह योगदान अनुकरणीय और प्रेरणादायी है।

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