Mindhal Mata Temple History || पत्थर बने 7 बेटे! जानिए मिंधल माता मंदिर की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

Mindhal Mata Temple History ||  सदियों पहले ‘घुंगती’ नामक एक विधवा महिला के घर में चूल्हे से माता ‘शिला’ के रूप में प्रकट हुई थीं। महिला द्वारा बार-बार रोकने पर माता ने क्रोधित होकर चूल्हा फाड़ दिया और साक्षात रूप में बाहर आ गईं। मंदिर का प्रबंधन अब स्थानीय कमेटी के पास है। यहाँ साल […]
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Mindhal Mata Temple History || पांगी घाटी के मंदिरों में मिंधल माता का मंदिर विख्यात और प्राचीन माना जाता है। इस मंदिर का पुरातात्विक दृष्टि से बहुत महत्व है। इसके साथ अत्यंत रोचक दंतकथा के मुताबिक कहा जाता है कि किसी समय मिंधल गांव में एक गरीब विधवा महिला रहती थी। उसके सात पुत्र थे। वे सभी विवाहित थे। उनकी मां जहां दिन भर कामों में व्यस्त रहती थी, वहीं उनके बेटे घर से बाहर खेती-बाड़ी में लगे रहते थे।
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Mindhal Mata Temple History || एक दिन ऐसा समय आया कि विधवा महिला सुबह के समय चूल्हे से राख निकाल रही थी। उसी दौरान अचानक देखा कि चूल्हे के बीच से एक पत्थर शिला बनकर बाहर निकल रहा है। विधवा महिला ने इसे करछी से दबाने का प्रयत्न किया, लेकिन वो लगातार निकलता रहा। इसके बाद महिला ने जब ये बात अपने सातों पुत्रों को बताई, तो उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने अपनी मां को समझाया कि वो घर का काम ठीक तरह से करे, इस फिजूल की बातों में ध्यान न गवाएं।
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Mindhal Mata Temple History || वहीं अगले दिन फिर बुढ़िया जब खाना पकाने लगी, तो उस दौरान पत्थर से एक आवाज आई कि मैं चामुंडा देवी हूं और अपने घर में प्रकट होना चाहती हूं। विधवा महिला ने उसे फिर करछी से दबाने की कोशिश की, लेकिन मां मिंधल वासिनी तब तक चूल्हा फाड़ कर बाहर निकल गई थीं। इसके बाद मां ने बुढ़िया को श्राप दिया कि आज तेरे सातों पुत्र जहां खेती कर रहे हैं, वहीं अपनी पत्नियों सहित पत्थर बन जाएंगे। देखते ही देखते बुढ़िया जब खेत की ओर भागी, तो उसे सात बेटे पत्थर के रूप में दिखाई दिए। बुढ़िया ने जब ये बात गांव वालों को बताई, तो उसकी इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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Mindhal Mata Temple History || वह रोती-बिलखती हुई घर वापस चली गई और चामुंडा मां से विनती करने लगी। उसने कहा कि उसके गांव में कोई बात नहीं सुन रहा है, केवल उसका उपहास ही उड़ाया जा रहा है। मां चामुंडा ने इस अनादर को देखकर गांव के लोगों को श्राप दिया कि वे आज के बाद इस गांव में कोई भी व्यक्ति चारपाई पर नहीं सो सकेंगे और खेत में केवल एक ही बैल से खेती कर सकेंगे। दूसरा यदि जोड़ा जाए तो वो मर जाएगा।
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Mindhal Mata Temple History || मिंधल गांव में ये घटना हो चुकी है। जब अंग्रेजों के शासन के दौरान एक घमंडी अंग्रेज ने मां के इस इतिहास का दुस्साहस किया, तो दो बैलों से मिंधल गांव में खेती करने का प्रयास करने लगा। लेकिन एक बैल खेत में ही मारा गया। इसके अलावा मां ने गांव वासियों को ये श्राप दिया कि गांव प्राकृतिक विपदा का शिकार बन जाएगा और ऐसा ही होता आया। इसके बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर मां मिंधल वासिनी से क्षमा मांगी और वहां पर एक भव्य मंदिर बनाने का निश्चय किया। मां से आग्रह करके उस विधवा ने भी मां से पत्थर बन जाने का वर मांगा। चामुंडा ने ये बात मानी और अपनी प्रतिमा के साथ उसकी प्रतिमा भी स्थापित करवा दी। आज भी इस मंदिर में वे दो प्रतिमाएं विद्यमान हैं। मिंधल माता की पूजा से पहले उस विधवा के पत्थर की पूजा की जाती है।
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Mindhal Mata Temple History || मिंधल गांव में आज भी कोई व्यक्ति चारपाई पर नहीं सोता। किसान एक ही बैल से खेती करते हैं। पांगी घाटी का मिंधल मंदिर सबसे विख्यात है। इसे चामुंडा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रो मास में यहां मेला लगता है जिसमें अनेक गांव के देवी-देवता पधारते हैं। देवी को पशु बलि देने की प्रथा भी थी, जो नए कानूनों के चलते बंद कर दी गई है। मिंधल गांव का नामकरण मिंधल माता के नाम पर हुआ है। इस गांव की खास बात ये है कि यहां का किसान अपने खेतों में केवल एक बैल से ही खेती करता है, जो कि अपने आप में ही अचंभा है। ऐसा यहां मिंधल माता के श्राप के कारण हुआ है। धीरे-धीरे मिंधल माता के चमत्कारों की बात चंबा तक पहुंची। तब चंबा के राजा ने पांगी जाकर मिंधल माता की परीक्षा लेने की सोची।
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Mindhal Mata Temple History || तो मंदिर पहुंचकर जब पंडित से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने राजा को परीक्षा लेने से रोका। परंतु राजा के हठ के कारण पंडित भी विफल हो गया। तब पंडित ने कहा कि यदि आप परीक्षा लेना चाहते हैं, तो माता की प्रतिमा को स्पर्श कीजिए। स्पर्श करने पर राजा का हाथ मिंधल माता की प्रतिमा के साथ चिपक गया। बहुत प्रयासों के बावजूद जब राजा हाथ हटाने से असमर्थ रहे, तब उन्होंने माता मिंधल से क्षमा याचना की और तब जाकर राजा मुक्त हुए। आज भी मिंधल माता के साथ लोगों की काफी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। जो भी भक्त यहां आता है, अपनी मनोकामनाएं पूरी करता है।