पांगी: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चंबा (Chamba) जिला के पांगी (Pangi) उपमंडल की ग्राम पंचायत सहाली के हिलौर गांव में स्थित माल देई माता (Mal Dei Mata) के ऐतिहासिक मंदिर का जिर्णोद्धार कार्य जोरों पर है। प्रजा मंडल (Praja Mandal) की अगुवाई में यह काम पूरे विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। करीब 14 साल बाद मंदिर का पुनः निर्माण (Reconstruction) किया जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
एक जून को मंदिर को विधिवत उखाड़ा गया
प्रजा मंडल की ओर से बीते रविवार, यानी 1 जून को विधिपूर्वक मंदिर को उखाड़ा गया। अब इसका नया निर्माण कार्य (Construction Work) शुरू हो चुका है, जिसमें बड़ी धनराशि (Funds) खर्च की जा रही है। इस पुनर्निर्माण में स्थानीय लोगों (Local People) और विभिन्न संस्थाओं (Institutions) की ओर से आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
श्रद्धा से जुड़ा 14 साल का चक्र
मंदिर के पुजारी जय राम ने जानकारी दी कि हर 14 साल बाद मंदिर का जिर्णोद्धार करना धार्मिक मान्यता (Religious Belief) का हिस्सा है। जैसे ही यह अवधि पूरी हुई, प्रजा मंडल ने माल देई माता के मंदिर को फिर से नया स्वरूप देने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि यह कार्य पूरी तरह श्रद्धा (Faith) और रीति-रिवाजों के अनुसार किया जा रहा है। मंदिर निर्माण में आने वाला खर्च काफी अधिक है, ऐसे में समाज के हर वर्ग से सहयोग की जरूरत है। मंदिर निर्माण के अगले चरण में आने वाले रविवार को मंदिर की टोपी चढ़ाई जाएगी। इस मौके पर मंदिर परिसर में जातर मेले (Fair) का आयोजन भी किया जाएगा। प्रजा मंडल श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था भी करेगा ताकि सभी आगंतुकों को उचित सेवा मिल सके।
माल देई माता का इतिहास बेहद रहस्यमयी और आस्था से जुड़ा
हिलौर गांव में स्थित माल देई माता (Mal Dei Mata) का मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि रहस्यों से भी भरपूर है। मंदिर के पुजारी जै राम के अनुसार, माता माल देई यहां एक शिला के रूप में प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि जब माता गांव की ओर आईं, तो पहाड़ी चढ़ते समय कई स्थानों पर उन्होंने विश्राम किया। जहां-जहां माता ने विश्राम किया वहां चरण पादुका आज भी मौजूद हैं, जिन्हें भक्त श्रद्धा से नमन करते हैं। आखिर में माता जब गांव के ऊपरी हिस्से में पहुंचीं, तो सर्गी नामक स्थान पर शिला रूप में विराजमान हो गईं। उस स्थान को लेकर एक अटूट मान्यता है – जहां माता प्रकट हुईं, वहां से ऊपर कोई इंसान अपना घर नहीं बना सकता। यदि कोई इस परंपरा का उल्लंघन करता है, तो उसका घर स्वयं ध्वस्त हो जाता है। ऐसा अतीत में भी कई बार हो चुका है, जिससे लोगों की आस्था और भी गहरी हुई है। बताया जाता है कि माता जिस स्थान पर प्रकट हुईं, वहां उनका सिर धरती की ओर झुका हुआ था। स्थानीय लोग इसे पाताल लोक का संकेत मानते हैं। गांव में उस समय एक परिवार में छह भाई रहते थे। उन्होंने जब यह शिला का सिर झुका हुआ देखा तो उसे ठीक करने का प्रयास किया। भाईयों ने जब शिला को सीधा किया तब दोपहर का समय हो गया और वे भोजन करने चले गए। जब वे वापस लौटे, तो देखा कि पूरी शिला खून से लथपथ है। यह दृश्य देखकर वे छहों भाई वहीं मूर्छित हो गए। आज भी यह स्थान रहस्य और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। माना जाता है कि माता माल देई के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। माना जाता है कि माल देई माता के दरबार में जो भी सच्चे मन से अपनी मुराद मांगता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। प्रजा मंडल ने अपील की है कि लोग इस धार्मिक अवसर (Religious Opportunity) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
नोट : प्रजामंडल हिलौर के बैंक डिटेल में कुछ खामियां होने के कारण उसे रिमूव किया गया है यदि कोई श्रद्धालु अपनी इच्छा से दान देना चाहता है तो वह मंदिर में दे सकता है!