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Chamba Pangi News: 700 किमी का सफर और दो राज्यों की खाक छानने की मजबूरी! पांगी वासियों ने प्रशासन से फिर मांगी हवाई सेवा

पांगी:  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दुर्गम पांगी घाटी के लोग आज के आधुनिक युग में भी एक ऐसी विडंबना को जीने के लिए मजबूर हैं। बर्फीली चोटियों के बीच कैद इस घाटी के लोगों को अपने ही जिला मुख्यालय चंबा पहुंचने के लिए हज़ारों रुपये और दो-दो राज्यों की खाक छाननी पड़ती है। आलम यह है कि सर्दियों…
Chamba Pangi News
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HIGHLIGHTS
  • जान जोखिम में डालकर सफर करने की मजबूरी

पांगी:  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दुर्गम पांगी घाटी के लोग आज के आधुनिक युग में भी एक ऐसी विडंबना को जीने के लिए मजबूर हैं। बर्फीली चोटियों के बीच कैद इस घाटी के लोगों को अपने ही जिला मुख्यालय चंबा पहुंचने के लिए हज़ारों रुपये और दो-दो राज्यों की खाक छाननी पड़ती है। आलम यह है कि सर्दियों के मौसम में जब बर्फ के ऊंचे पहाड़ रास्तों को रोक देते हैं तभी लोगों की मुसिबतें शुरू हो जाती है।

पांगी वासियों का कहना है कि यह किसी मजाक से कम नहीं कि उन्हें अपने काम के लिए चंबा जाने हेतु तकरीबन 600 से 700 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। अगर वे वाया जम्मू होकर चंबा जाते हैं, तो उन्हें 500 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जबकि वाया कुल्लू-मनाली यह सफर 600 किलोमीटर से भी ऊपर निकल जाता है। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि एक ही जिले के भीतर एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग राज्यों की सीमाओं को पार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों द्वार हर साल अपनी  मांग को जिला प्रशासन वह स्थानिये प्रशासन के समक्ष उठाते आए है। लेनिक आज दिन तक यह मांग पूरी नहीं हुई है।

घाटी के लोगा प्रदेश सरकार से मांग कर रहे है कि जिस तर्ज पर कुल्लू, चंडीगढ़ और रिकांगपिओ के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू की गई है, उसी तरह चंबा के सुल्तानपुर हेलीपैड से पांगी के लिए भी विशेष उड़ानें चलाई जाएं। स्थानीय निवासी राम सिंह, देवराज, इंद्र सिंह और अमरचंद ने बताया कि सप्ताह में कम से कम तीन दिन हवाई सेवा का होना अनिवार्य है। उनका कहना है कि भारी बर्फबारी के बाद जब हफ्तों तक समूचा जनजातीय क्षेत्र दुनिया से कटा रहता है।

जान जोखिम में डालकर सफर करने की मजबूरी

हाल ही में हुई बर्फबारी ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। लगभग एक सप्ताह तक पांगी घाटी का शेष दुनिया से संपर्क पूरी तरह कटा रहा। काफी मशक्कत के बाद जब बीआरओ (BRO) ने कुल्लू-मनाली की ओर मुख्य सड़क को बहाल किया, तब भी वहां से सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़कों पर जमी बर्फ और हिमस्खलन के खतरे के बीच आवाजाही करना जान जोखिम में डालना है।  पंगवाल एकता मंच के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने बताया कि पांगी के लोगों को आज भी एक-एक सप्ताह तक दुनिया से कटे रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो कि एक चिंता का विषय है। त्रिलोक ठाकुर ने बताया कि वह लंबे समय से हवाई सेवा की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार प्रशासन और सरकार की ओर से आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगता।

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Web Title: Chamba pangi valley demand regular helicopter service winter connectivity updates
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