Himachal News: मंडी: जिला मंडी के बगस्याड शमशेर गांव की एक गर्भवती महिला स्मृति ठाकुर ने 30 जून की आपदा को भी मात देकर अपने हौंसले को बुलंद रखा। गांव में बादल फटने से पूरी तरह से पानी भर गया था। इसके पिता का घर भी पानी की चपेट में आ गया था। बड़ी मुश्किल से पिता ने अपने मां-बाप के साथ बेटी को भी सुरक्षित जगह पहुंचाया। इस बीच बेटी को डिलीवरी की पीड़ा शुरू हो गई। अब पिता को बेटी को अस्पताल पहुंचाना था। साधन नहीं थे। बेटी ने एक घंटे तक नंगे पांव पैदल चलकर जैसे तैसे बगस्याड तक का सफर पूरा किया।
आगे भी सडक़ बंद होने के चलते पिता ने जेसीबी की सहायता से सडक़ को कांढा तक खुलवाया। आगे सडक़ के ठीक होने के चलते वाहन द्वारा उसे वाहन से मंडी के गुटकर स्थित मांडव अस्पताल में पहुंचाया गया। नंगे पांव चलकर आई यह महिला जहां एक तरफ डिलीवरी की पीड़ा से पीडि़त थी वहीं पर उसने हौंसले और हिम्मत से पैदल चलकर आपदा को मात दे दी। मांडव अस्पताल में महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बेटे को पाकर महिला भी आपदा के जख्म को भूल गई।
शमशेर गांव बगस्याड से तीन चार किमी की दूरी पर है। उसी रोज रात को उसके पिता सोहन सिंह का घर आपदा की पानी से भर गया था। सोहन सिंह ने अपने परिवार और गर्भवती बेटी को किसी तरह बाहर निकाला और सुरक्षित जगह तक लेकर गए। फिर परिजनों और ग्रामीणों की सहायता से तय किया गया कि बेटी को बहुत दर्द हो रहा है। फिर उसे पैदल चलाकर ही अस्पताल जाने का निर्णय लिया।
बेटी डिलीवरी के लिए पिता के घर आई थी। मगर आपदा में पिता का दर्द दोगुना कर दिया मगर हिम्मत नहीं छोड़ी। जज्बा नहीं छोड़ा। आखिरकार बेटी को अस्पताल पहुंचाकर ही दम लिया। पिता सोहन सिंह ने बताया कि आज उनकी बेटी की गोद भर गई है। उन्हें आपदा का दर्द भी अब महसूस नहीं हो रहा है क्योंकि उनकी बेटी व दोहता सुरक्षित है।