शिमला: सीबीआई की एक टीम हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के प्रमुख इंजीनियर विमल नेगी (Vimal Negi, Chief Engineer, Himachal Pradesh Power Corporation) की मौत की जांच करने के लिए शिमला पहुंच गई है। दिल्ली से डीएसपी की अगुवाई में विशेष अपराध शाखा की टीम अल सुबह सोलन पहुंची और फिर शिमला चली गई। दिल्ली की टीम शिमला में सीबीआई के कार्यालय से रिकॉर्ड (Records from the office) जुटाने में सहयोग ले रही है। शिमला कार्यालय विमल नेगी (Shimla Office Vimal Negi) मामले में हजारों पन्नों का जांच रिकॉर्ड है। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह (Brajendra Prasad Singh) को दी गई है। सीबीआई से एक इंस्पेक्टर, एक स्टेनो और एक कांस्टेबल उनके साथ शिमला पहुंचे हैं। सीबीआई टीम को सोलन एसपी कार्यालय से गाड़ी मिली।
26 मई को नई दिल्ली की विशेष अपराध शाखा (Special Crime Branch) में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। सीबीआई ने आत्महत्या के लिए उकसाने और सामूहिक इरादे से अपराध को अंजाम देने की धाराएं लगाते हुए एफआईआर दर्ज की। भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 108 और 3(5) के तहत यह केस दर्ज किया गया था। शिमला पुलिस की एफआईआर को सीबीआई ने केस का आधार बनाया। एफआईआर में पावर कॉरपोरेशन के पूर्व निदेशक देसराज और पूर्व एमडी हरीकेश मीणा भी नामजद हैं।
हिमाचल सरकार पीटरहॉफ और सर्किट हाउस (विली पार्क) को पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत मामले की जांच करने आ रही सीबीआई को देने को तैयार नहीं है। सीबीआई अधिकारी पिछले गुड़िया कांड के दौरान भी कई महीने पीटरहॉफ में रहे। इस पर भी पर्यटन निगम ने लाखों रुपये का बिल सरकार को थमाया, लेकिन बिल नहीं वसूला गया। गुड़िया कांड की जांच करने वाले सीबीआई जांचकर्ता राज्य के गेस्ट थे। अगर सीबीआई ने सरकार से आवास और बेस कैंप बनाने के लिए कमरों की मांग की, तो उसे रेस्ट हाउस मिलेंगे। वहीं, पेखुबेला प्रोजेक्ट हाईकोर्ट को सौंपी गई प्रशासनिक रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय भी वित्तीय लेने-देने की आशंका के चलते इस मामले की जांच कर सकता है। ऐसे में सीबीआई विमल नेगी के परिजनों, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ओंकार शर्मा, पुलिस महानिदेशक अतुल वर्मा, पुलिस अधीक्षक संजय गांधी और एसआईटी के सदस्यों से भी पूछताछ करेगी। ओंकार शर्मा की रिपोर्ट में अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज होंगे।