Himachal High Court: पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी को बड़ी राहत, PM मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने किया बरी
Himachal High Court: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रसूख रखने वाले कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी के लिए न्यायपालिका से बड़ी राहत की खबर आई है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपों से उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है। कोर्ट ने भरमौर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर चल रही सभी कानूनी कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है।
मुकदमे को अग्निपरीक्षा मान कोर्ट ने दी राहत
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने याचिकाकर्ता ठाकुर सिंह भरमौरी की दलीलों को स्वीकार किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में कार्रवाई को आगे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि यदि इस मुकदमे को जारी रखा जाता है, तो यह न केवल याचिकाकर्ता के लिए अनावश्यक परेशानी का सबब बनेगा, बल्कि उन्हें एक लंबे और थकाऊ मुकदमे की अग्निपरीक्षा से भी गुजरना पड़ेगा, जिसका परिणाम शून्य होने की संभावना अधिक है।
पुलिस की जांच रिपोर्ट पर कोर्ट के कड़े सवाल
हाई कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश की गई अंतिम जांच रिपोर्ट (Final Report) पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि शिकायत में ठाकुर सिंह भरमौरी द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अपमानजनक टिप्पणियों के संबंध में कोई स्पष्ट और विशिष्ट विवरण नहीं दिया गया था। कानूनी दृष्टिकोण से, केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि उन शब्दों का सटीक प्रमाण न हो। कोर्ट ने माना कि बिना किसी ठोस रिकॉर्ड के आचार संहिता या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन का मामला नहीं बनता।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद साल 2021 का है, जब प्रदेश में उपचुनावों की गहमागहमी थी। ठियोग निवासी भाजपा पदाधिकारी सुरेंद्र सिंह घोंकरोत्रा ने 3 अक्टूबर 2021 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी शिमला को एक ईमेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ठाकुर सिंह भरमौरी ने एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है, जो आदर्श आचार संहिता और भारतीय दंड संहिता की धाराओं का उल्लंघन है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस शिकायत को आगामी जांच के लिए भरमौर पुलिस को भेज दिया था।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति और कानूनी मर्यादा
ठाकुर सिंह भरमौरी ने शुरू से ही इन आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया था कि उनके खिलाफ राजनीतिक द्वेष के चलते मामला दर्ज किया गया है और उनके विरुद्ध कोई ठोस केस नहीं बनता है। हाई कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर चुनावी रैलियों में होने वाली बयानबाजी और कानूनी सीमाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है। कोर्ट ने माना कि बिना किसी विशिष्ट साक्ष्य के किसी राजनेता पर आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं है। इस फैसले से भरमौरी के राजनीतिक सफर में आ रही एक बड़ी बाधा दूर हो गई है।
