Himachal News: कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू (Kullu) की विशेष अदालत (Special Court) ने आंगनबाड़ी (Anganwadi) में नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेज (Fake Documents) तैयार करने के मामले में चार लोगों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई है। यह मामला 2014 में दर्ज हुआ था, जब शिकायतकर्ता विमला देवी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर नियमों का उल्लंघन किया और अवैध रूप से नौकरी हासिल की। शिकायत में मुर्त देवी, उनके पति नीरत सिंह और बहू निर्मला देवी ने सरकारी नियमों (Government Rules) को दरकिनार कर नौकरी पाने के लिए गलत तरीके अपनाए। उन्होंने परिवार की वार्षिक आय (Annual Income) कम दिखाने के लिए झूठे शपथ पत्र (Affidavit) तैयार किए। इसके अलावा, मुर्त देवी ने तलाक (Divorce) के फर्जी दस्तावेज बनवाए और पंचायत सचिव देवेंद्र कुमार से मिलीभगत कर परिवार रजिस्टर (Family Register) में हेरफेर किया। पंचायत रिकॉर्ड में हेरफेर कर उनका नाम पुराने रजिस्टर से हटाकर चकुरठा पंचायत में दर्ज कराया गया।
शिकायत मिलने के बाद 1 जुलाई 2014 को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (State Vigilance & Anti-Corruption Bureau) कुल्लू में इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। जांच अधिकारी (Investigating Officer) दौरजे राम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों (Documentary Evidence) के आधार पर मामले की जांच शुरू की। लंबी जांच के बाद 2016 में चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल की गई।
विशेष अदालत ने 25 गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार दिया। मुर्त देवी, नीरत सिंह और निर्मला देवी को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 420 और 120-B के तहत तीन साल की सजा और ₹10,000 का जुर्माना (Fine) लगाया गया। वहीं, पंचायत सचिव देवेंद्र कुमार को धारा 420, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(2) के तहत तीन साल की सजा और ₹20,000 का जुर्माना दिया गया।