मनोरंजन

Suhani Bhatnagar Dermatomyositis || इस अजीब लाइलाज बीमारी से हुई दंगल गर्ल’ सुहानी भटनागर की मौत, 2 तरह के लोगों को इसका ज्यादा रिस्क

अभी तक डॉक्टर और वैज्ञानिक भी ढूंढ नहीं पाए हैं इस बीमारी का पूर्ण इलाज
An image of featured content
This is the caption text
HIGHLIGHTS
  • क्या है डर्मेटोमायोसाइट्स के लक्षण ||Suhani Bhatnagar Dermatomyositis || 
  • डर्मेटोमायोसाइट्स का इलाज||Suhani Bhatnagar Dermatomyositis || 

Suhani Bhatnagar Dermatomyositis ||  दोस्तों आज के जमाने में किस व्यक्ति को कौन सी बीमारी (disease) हो जाए इसके बारे में कहा नहीं जा सकता। आए दिन लगातार नई-नई बीमारियां सामने आती है और ऐसे में लोग इन बीमारियों से ग्रसित होने के बाद इस दुनिया से चले जाते हैं।  और पीछे छोड़ जाते हैं अपनी यादें। अब आप सोच रहे होंगे कि हम यह इमोशनल ( imotional) शब्द यहां क्यों बता रहे हैं।

दरअसल बॉलीवुड की बहु चर्चित दंगल गर्ल सुहानी भटनागर की मौत हो गई है। वह  डर्मेटोमायोसाइट्स (Dermatomyositis )नाम की एक खतरनाक बीमारी (danger disease) से ग्रसित थी। सुहानी की मौत खबर सुनते ही उनके परिवार वालों के साथ-साथ फैंस में शोक की लहर दौड़ गई थी। वह करीब 10 -11 दिन से दिल्ली के सुप्रसिद्ध एम्स (AIMS) में भर्ती (admit) थी पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।  सुहानी के माता-पिता ने बताया कि वह पिछले दो महीनों से बिस्तर पर थी और एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही थी। उनकी बेटी की मौत 16 फरवरी को हुई सुहानी के पिता (father) ने बताया कि 2 महीने पहले उनकी बेटी के उल्टे हाथ में सूजन आनी शुरू हुई थी। उन्होंने सूजन साधारण समझा लेकिन फिर भी सूजन धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलती गई और आखिरकार यह है दंगल गर्ल (Dangal girl) सुहानी भटनागर की मौत का कारण बनी।

सुहानी के पिता के अनुसार डॉक्टर भी समय रहते बीमारी की पहचान नहीं कर पाए । उन्होंने बेटी को कई डॉक्टरों को दिखाया। इलाज के लिए एक इधर-उधर भागे । पर इस बीमारी के बारे में समय रहते किसी को कोई पता नहीं चला। एम्स में भर्ती करने के बाद पता चला की सुहानी को कोडर्मेटोमायोसाइट्स नाम की दुर्लभ बीमारी हुई है।

इस दुर्लभ बीमारी में मांसपेशियों के अलावा त्वचा और फेफड़ों में सूजन आ जाती है। मायोसाईटिस, इसका मतलब ही होता है की मसल्स में इन्फ्लेमेशन यानी दर्द और सूजन है। इस बीमारी में त्वचा पर खास तरह के लाल चकते भी दिखाई देते हैंम इससे शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है यानि शरीर बीमारियों से नहीं लड़ सकता है यानी कमजोर हो जाता है। इसका एकमात्र इलाज है स्टेरॉयड लेकिन इससे इम्यून सिस्टम के और अधिक प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। इस बीमारी में सेल्स में इन्फ्लेमेशन हो जाती है जिसके कारण मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती है। आमतौर पर यह वयस्कों में 40 से 60 साल की उम्र के बीच में होती है महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों के मुकाबले में अधिक देखी जा सकती है।

क्या है डर्मेटोमायोसाइट्स के लक्षण ||Suhani Bhatnagar Dermatomyositis || 

डर्मेटोमायोसाइट्स नाम बीमारी के लक्षण कभी-कभार बहुत देर से दिखाई देते हैं। पर कभी अचानक दिखने लगते हैं। खास तौर पर इसका पहला संकेत त्वचा में बदलाव होना शुरू हो जाता है और त्वचा सबसे पहले वायलेट या डस्की रंग की होने लगती है।  इससे त्वचा पर रेशेज होने लगते हैं। यह रेशेज आम तौर पर चेहरा और आंखों के आसपास दिखते हैं । इनमें खुजली भी होती और दर्द भी होता। इससे इम्मयून सिस्टम बहुत कमजोर होने लगता है। उठने बैठेने में दिक्कत होती है। 

डर्मेटोमायोसाइट्स का इलाज||Suhani Bhatnagar Dermatomyositis || 

डर्मेटोमायोसाइट्स  यह कैसी बीमारी है जिसका अभी तक पूर्ण रूप से इलाज वैज्ञानिक और डॉक्टर नहीं ढूंढ पाए हैं। फिर भी इलाज से इसके लक्षणों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। इसमें इलाज का मुख्य उद्देश्य होता है कि चकतों  को ठीक करना और मांसपेशियों को फिर से मजबूत बनाना। इसके लिए डॉक्टर कुछ दवाइयां, कुछ खास थेरेपी और कभी कभार खास तरह का खान-पान करने का सुझाव भी देते हैं। इस तरह से आप भी इस जानकारी को प्राप्त करके सतर्क रह सकते हैं।

विज्ञापन