Chamba Pangi News || पांगी वासियों के अंधेरे दिन अब दूर, थिरोट से पहुंची बिजली, कल सुबह 9 बजे से रोशन होंगी 19 पंचायतें
- विकास में रोड़ा बना वन विभाग?
- पुराने खंभे नहीं दिखे, अब नियम याद आए
Chamba Pangi News || पांगी: जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी (Pangi Valley) के निवासियों के लिए राहत की बहुत बड़ी खबर है। वर्षों से बिजली की आंख-मिचौली झेल रहे लोगों की समस्या अब हमेशा के लिए दूर होने जा रही है। बिजली बोर्ड की कड़ी मेहनत रंग लाई है और थिरोट से 33 केवी लाइन शौर तक सफलतापूर्वक पहुंचा दी गई है। बोर्ड ने आज शाम को इसका सफल ट्रायल (Successful Trial) भी कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, वीरवार सुबह करीब 9 बजे पूरे क्षेत्र में बिजली सप्लाई (Electricity Supply) सुचारू रूप से चालू कर दी जाएगी। इससे कड़ाके की ठंड में लोगों को अंधेरे में रातें नहीं गुजारनी पड़ेंगी।
फिलहाल वन विभाग के साथ चल रहे विवाद के चलते शौर से आगे किलाड़ तक पूरी क्षमता वाली लाइन नहीं बिछ पाई है। मजबूरी में बोर्ड ने शौर से आगे साच घराट तक पुरानी लाइन के जरिए ही 11 केवी लाइन (11 KV Line) को जोड़ दिया है। इस व्यवस्था से पांगी की करीब 19 पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, मिंधल, रेई, कुलाल, शौर और पुर्थी पंचायतों को अब परमानेंट लाइट (Permanent Light) की सुविधा मिलेगी। यानी अब वोल्टेज की दिक्कत और बार-बार बत्ती गुल होने का झंझट खत्म हो जाएगा।
विकास में रोड़ा बना वन विभाग?
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ सरकार पांगी के विकास के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग (Forest Department) अपने अधिकारों की आड़ में विकास कार्यों में रोड़े अटका रहा है। विभाग शौर से आगे 33 केवी लाइन बिछाने के लिए एफसीए (FCA Clearance) यानी वन संरक्षण अधिनियम का हवाला दे रहा है। जबकि हकीकत यह है कि यह कोई नई लाइन नहीं है। पहले भी इसी रूट पर थिरोट से किलाड़ तक बिजली की लाइन बिछी हुई थी, जिसे अब केवल अपग्रेड (Upgrade) किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब पहले लाइन बिछी थी, तब अनुमति कैसे मिली थी और आज वही काम अवैध कैसे हो गया?
पुराने खंभे नहीं दिखे, अब नियम याद आए
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि वन विभाग का यह रवैया समझ से परे है। जब बीआरओ (BRO) द्वारा सड़क निर्माण के दौरान किलाड़ से थिरोट तक पुराने बिजली के खंभों को क्षतिग्रस्त किया गया, तब वन विभाग को कोई आपत्ति नहीं हुई। लेकिन अब जब बिजली बोर्ड (Electricity Board) पिछले दो सालों से नई 33 केवी लाइन लाने की कोशिश कर रहा है, तो विभाग अड़चनें पैदा कर रहा है। साच घराट पावर हाउस बनने के बाद पुरानी लाइन बंद कर दी गई थी, लेकिन उसका रूट तो वही है। वन विभाग की इस लकीर की फकीरी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो विकास के इस दौर में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
