ATM Services || अब प्राइवेट कंपनी संभालेगी 5000 ATM, कैश की किल्लत होगी खत्म
- अब खाली नहीं मिलेंगे एटीएम
- अन्य बैंकों के लिए बनेगा नजीर
ATM Services || सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। बैंक ने अपने एटीएम नेटवर्क के संचालन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। एसबीआई ने देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद अपने लगभग 5,000 एटीएम को मैनेज करने की जिम्मेदारी अब खुद न संभालकर एक प्राइवेट कंपनी को सौंपने का फैसला किया है। बैंक का यह निर्णय एटीएम सेवाओं (ATM Services) को और भी चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लिया गया है, ताकि लोगों को पैसे निकालने में कोई परेशानी न हो।
बैंक ने इन 5 हजार एटीएम के रखरखाव और कैश मैनेजमेंट का काम निजी सेवा प्रदाता (Private Service Provider) कंपनी ‘सीएमएस इन्फो सिस्टम्स लिमिटेड’ को दिया है। बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, यह नया अनुबंध जनवरी 2026 से प्रभावी हो जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट पूरे 10 साल के लिए किया गया है। इसके तहत अब एटीएम में समय पर कैश डालने, मशीनों की तकनीकी निगरानी करने और लॉजिस्टिक्स (Logistics) से जुड़े सारे काम यह प्राइवेट कंपनी ही संभालेगी। इसका सीधा मतलब है कि अब बैंक के कर्मचारी इन कामों में नहीं उलझेंगे और वे ग्राहकों की दूसरी समस्याओं पर ध्यान दे पाएंगे।
अब खाली नहीं मिलेंगे एटीएम
अक्सर ग्राहकों को शिकायत रहती थी कि जब भी वे एटीएम जाते हैं, तो या तो मशीन खराब मिलती है या फिर उसमें कैश नहीं होता। एसबीआई का मुख्य उद्देश्य एटीएम के ‘डाउन टाइम’ (Downtime) को कम करना है। यानी मशीनें ज्यादा समय तक चालू रहें और बंद न पड़े। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों (Semi-urban Areas) में यह समस्या बहुत ज्यादा थी। अब एक समर्पित एजेंसी होने की वजह से उम्मीद की जा रही है कि मशीनों की मरम्मत तुरंत हो सकेगी और कैश की किल्लत भी नहीं रहेगी।
अन्य बैंकों के लिए बनेगा नजीर
जानकारों का मानना है कि एसबीआई का यह कदम बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। अब तक ज्यादातर सरकारी बैंक एटीएम का काम आंतरिक स्तर पर या छोटी एजेंसियों के जरिए कराते थे। लेकिन पहली बार इतने बड़े पैमाने पर काम को आउटसोर्स (Outsource) किया गया है। अगर एसबीआई का यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में दूसरे सरकारी बैंक भी इसी राह पर चल सकते हैं। इससे न सिर्फ ग्राहकों का अनुभव सुधरेगा, बल्कि बैंकों की लागत भी नियंत्रित होगी।
