Chamba Pangi News || पांगी में एक झटके में 95% लोग बने अमीर, 2000 से ज्यादा गरीब परिवारों का BPL से कटा नाम

Chamba Pangi News || हिमाचल प्रदेश सरकार के एक फैसले ने जनजातीय क्षेत्र पांगी में कोहराम मचा दिया है। प्रशासन द्वारा जारी नई बीपीएल सूची में 2162 में से 2022 परिवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। लोगों का आरोप है कि सरकार की नई शर्तें इतनी कड़ी हैं कि उन्हें पूरा कर पाना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है।
Chamba Pangi News || पांगी में एक झटके में 95% लोग बने अमीर, 2000 से ज्यादा गरीब परिवारों का BPL से कटा नाम
चंबा के पांगी में 2000 से ज्यादा गरीब परिवारों का BPL से कटा नाम

Chamba Pangi News || पांगी: हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों पांगी निवासियों पर प्रदेश सरकार कर ओर से एक बड़ा झटका दिया हुआ है। पांगी के हजारों गरीबों को एक ही झटके में अमीरों की कतार में खड़ा कर दिया है। सरकार की ओर से जारी एक नई अधिसूचना और उसके बाद हुए सर्वे ने पांगी की 19 पंचायतों में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रशासन ने कुल 2162 बीपीएल परिवारों में से 2022 परिवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब पूरी घाटी में मात्र 140 परिवार ही बीपीएल की श्रेणी में बचे हैं।

इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एसडीएम पांगी की देखरेख में एक रिपोर्ट तैयार की गई। प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर पांगी में बीपीएल परिवारों का दोबारा सर्वे करवाया गया। इसके लिए पंचायत स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सदस्य और पटवारी शामिल थे। इन कर्मचारियों ने घर-घर जाकर सर्वे किया और जो रिपोर्ट तैयार की, वह चौंकाने वाली थी। इस रिपोर्ट को बाद में खंड स्तर पर गठित बीएलसी को सौंपा गया। बीएलसी ने जब इस रिपोर्ट पर अपनी कैंची चलाई तो 2022 परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हमेशा के लिए काट दिए गए। वहीं अ​धिकारीयों ने इसके पिछे के कारणों पर  प्रदेश सरकार का हवाला देकर इस बात को टाल दिया हुआ है।

पांगी के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी रोष और गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह फैसला जमीनी हकीकत से कोसों दूर वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिया गया है। पांगी एक ऐसा क्षेत्र है जहां साल के छह महीने बर्फबारी रहती है और रोजगार के साधन न के बराबर हैं। यहां के अधिकतर परिवार अपनी आजीविका के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं। बीपीएल सूची से बाहर होने का मतलब है कि अब ये परिवार बीपीएल के तहत मिलने वाले कई लाभों से भी वंचित हो जाएंगे। लोगों का सीधा सवाल है कि सरकार ने किस आधार पर मान लिया कि पांगी के 95% लोग अचानक अमीर हो गए हैं।

स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुगलकी फरमान करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में जो नियम और शर्तें थोपी गई हैं, उन्हें पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव ही नहीं है। शर्तों को देखकर ऐसा लगता है कि सरकार की नजर में बीपीएल वही हो सकता है जो या तो पूरी तरह से बेघर हो, जिसके पास सिर छिपाने को छत न हो, या फिर वह कोई एकल विधवा महिला हो। अगर किसी के पास छोटा सा लकड़ी का मकान भी है, तो सरकार उसे गरीब मानने को तैयार नहीं है। यह मापदंड पांगी जैसी भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र के लिए पूरी तरह से अनुचित और अव्यावहारिक हैं। फिलहाल पांगी घाटी में सरकार के खिलाफ गुस्से की लहर है। लोग अपने चुने हुए प्रतिनिधियों और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वे बीपीएल से बाहर हो गए और उन्हें सस्ता राशन मिलना बंद हो गया।

इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए एसडीएम पांगी अमन दीप ने बताया कि प्रशासन ने अपनी मर्जी से कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 19 मार्च 2025 को प्रदेश सरकार की ओर से नई गाइडलाइन जारी की गई थी। प्रशासन ने उसी गाइडलाइन और अधिसूचना का अक्षरशः पालन करते हुए यह कार्यवाही की है। इसी प्रक्रिया के तहत सर्वे हुआ और स्क्रूटनी के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपात्र पाए गए। प्रशासन का कहना है कि वे केवल सरकारी आदेशों को जमीन पर लागू करने का काम कर रहे थे।

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