हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों का सब्र टूटा! हर महीने हो रहा 12,000 रुपये तक का नुकसान, जानिए कितना फंसा है आपका एरियर

शिमला: देवभूमि हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। लंबे समय से आस लगाए बैठे हैं कि कब सरकार उनकी जेब में रुका हुआ पैसा डालेगी। मामला महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) यानी डीए और वेतन आयोग के एरियर का है। फिलहाल स्थिति यह है कि प्रदेश में कर्मचारियों को सिर्फ 45 फीसदी डीए मिल रहा है। वहीं, अगर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की बात करें तो उन्हें 58 फीसदी डीए दिया जा रहा है। खबर तो यह भी है कि इस महीने केंद्र इसे बढ़ाकर 60 फीसदी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो हिमाचल के कर्मचारियों का पिछड़ापन और बढ़ जाएगा।
इस अंतर का सीधा असर कर्मचारियों की रसोई और घर के बजट पर पड़ रहा है। आंकड़ों को देखें तो प्रदेश के कर्मचारियों का लंबित डीए 15 फीसदी तक पहुंचने वाला है। इस वजह से कर्मचारियों को उनके मासिक वेतन (Monthly Salary) के हिसाब से हर महीने 4,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक का फटका लग रहा है। यह नुकसान छोटा नहीं है, खासकर तब जब महंगाई आसमान छू रही हो।
कोविड काल का दर्द और लाखों का बकाया
कर्मचारियों का कहना है कि कोविड के समय जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई है। उस दौरान 17 फीसदी डीए को फ्रीज कर दिया गया था। बाद में जब इसे बहाल करने की बात आई, तो रोक लगा दी गई। इस वजह से सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) को लाखों रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ा। जानकारों का कहना है कि हिमाचल के इतिहास में डीए का इतना बड़ा बैकलॉग यानी बकाया कभी नहीं बना था। कर्मचारी अब यही पूछ रहे हैं कि आखिर उन्हें उनके हक का पैसा कब मिलेगा?
इसके अलावा छठे वेतन आयोग का एरियर भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रदेश में 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2025 तक लागू छठे वेतन आयोग का एरियर अभी भी फंसा हुआ है। टीजीटी कला संघ के महासचिव विजय हीर ने बताया कि हालात बहुत खराब हैं। तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों का 3 से 9 लाख रुपये और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों का 6 से 15 लाख रुपये वेतन आयोग एरियर (7th Pay Commission Arrears) पेंडिंग है। सरकार ने बीच में 50 हजार की एक किस्त दी थी, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
सीएम से लगाई गुहार: ‘किश्तों में ही दे दो’
अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटने लगा है। राजकीय टीजीटी कला संघ ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री (Chief Minister) और वित्त सचिव को ज्ञापन भेजा है। संघ ने साफ कहा है कि सरकार को अब चुप्पी तोड़नी होगी। कर्मचारियों ने उस 33 साल वाले भुगतान पैटर्न को पहले ही नकार दिया था। उनकी मांग है कि केंद्र की तर्ज पर हिमाचल में भी डीए दिया जाए। अगर एक बार में पैसा देना संभव नहीं है, तो सरकार स्पष्ट नीति बनाए। चाहे हर महीने एक प्रतिशत डीए बढ़ाना शुरू करें या किश्तों में पैसा दें, लेकिन इस मांग को अब और टाला नहीं जा सकता।
