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Himachal Budget 2026: आर्थिक संकट के बीच CM सुक्खू का चौथा बजट, 1 लाख करोड़ के कर्ज और कम संसाधनों के बीच नई चुनौतियों का सामना

Himachal Budget 2026:  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 21 मार्च को अपना चौथा बजट पेश करेंगे। राज्य पर मंडरा रहे एक लाख करोड़ रुपये के कर्ज और केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में कटौती के बीच यह बजट काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सीएम ने बजट भाषण को अंतिम रूप देने के लिए अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें राजस्व बढ़ाने और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।
Himachal Budget 2026:
Himachal Budget 2026:
HIGHLIGHTS
  • 1 लाख करोड़ का कर्ज और केंद्र की बंद हुई मदद
  • फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम, संसाधन बढ़ाने की तैयारी
  • चुनावी वादों को पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती
  • क्या बजट से मिलेगी राहत?

Himachal Budget 2026:  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए इस बार का बजट पेश करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। 21 मार्च को जब सीएम अपना चौथा बजट भाषण पढ़ेंगे, तो सबकी निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि राज्य के आर्थिक संकट को कैसे दूर किया जाता है। हाल ही में बजट को अंतिम रूप देने के लिए बुलाई गई अधिकारियों की बैठक में सीएम ने साफ कर दिया है कि अब फोकस केवल खर्च करने पर नहीं, बल्कि आय के नए स्रोत खोजने पर होगा।

1 लाख करोड़ का कर्ज और केंद्र की बंद हुई मदद

राज्य की माली हालत इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश पर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज का बोझ है। स्थिति तब और बिगड़ गई जब केंद्र सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के रूप में मिलने वाली करीब 10 हजार करोड़ रुपये की राशि बंद कर दी। इसके अलावा, लोन लेने की सीमा को GDP के 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी करना और जून 2022 से जीएसटी कंपनसेशन का बंद होना, राज्य सरकार के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम, संसाधन बढ़ाने की तैयारी

अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में सीएम सुक्खू ने सभी विभागीय सचिवों को ‘इनकम बढ़ाने’ का टास्क दिया है। सरकार का मुख्य जोर अब वित्तीय अनुशासन (Fiscal Discipline) पर है। बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि कैसे योजनाओं को सुव्यवस्थित किया जाए और अनावश्यक खर्चों को कम करके बजट के घाटे को कम किया जा सके। सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं ताकि बजट में केवल उन्हीं योजनाओं को जगह मिले जो राज्य की आय में योगदान दे सकें।

चुनावी वादों को पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती

राजनीतिक रूप से देखें तो सीएम सुक्खू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की है। संसाधनों की कमी के बीच नई लोकलुभावन घोषणाएं करना या पुरानी योजनाओं को जारी रखना तलवार की धार पर चलने जैसा है। बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसमें 13 सिटिंग्स के दौरान विपक्ष इन आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा।

क्या बजट से मिलेगी राहत?

राज्य की जनता और कर्मचारी अब इस बजट की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। क्या सीएम सुक्खू कोई नया टैक्स लगाएंगे या फिर खर्चों में भारी कटौती करेंगे? यह तो 21 मार्च के बजट भाषण में ही साफ हो पाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि यह बजट आने वाले समय में हिमाचल की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने की दिशा में एक ‘ठोस कदम’ होगा। फिलहाल, पूरे राज्य का ध्यान इसी बात पर है कि संकट में घिरे हिमाचल को सीएम सुक्खू बजट के जरिए कौन सा संजीवनी बूटी देते हैं।

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Web Title: Himachal pradesh budget 2026 cm sukhu financial crisis
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