Chamba Pangi News || पांगी में BRO चीफ का बड़ा वादा, 46 साल बाद अब चकाचक होगी घाटी की सड़कें, डबल लेन की जगी उम्मीद

Chamba Pangi News || शिमला से पांगी पहुंचे बीआरओ के चीफ इंजीनियर राजीव कुमार ने स्थानीय लोगों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने पुर्थी से किलाड़ तक सड़क पर तारकोल बिछाने का काम युद्धस्तर पर पूरा करने का आश्वासन दिया। वहीं, ग्रामीणों ने 1978 से अधूरी पड़ी सड़कों को डबल लेन बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।
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 Chamba Pangi News ||  हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के कबायली क्षेत्र पांगी के निवासियों के लिए शनिवार का दिन नई उम्मीदों की किरण लेकर आया। शिमला से सीमा सड़क संगठन (BRO) के चीफ इंजीनियर (Chief Engineer) राजीव कुमार जब मुख्यालय किलाड़ पहुंचे, तो माहौल देखने लायक था। स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और पारंपरिक पंगवाली टोपी व शॉल पहनाकर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान पूर्व ब्लॉक चेयरमैन भानी चंद ठाकुर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। लोगों ने अपनी परेशानी बताते हुए मांग रखी कि ग्रीफ कैंप से लेकर महालू नाला तक की सड़क को जल्द से जल्द पक्का किया जाए, ताकि रोज-रोज की धूल और गड्ढों से मुक्ति मिल सके।

अधिकारियों के साथ हुई इस अहम बैठक में पांगी वासियों को एक बड़ा आश्वासन मिला है। चीफ इंजीनियर ने वादा किया है कि पुर्थी से किलाड़ तक तारकोल बिछाने का काम (Blacktopping Work) अब युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि पुर्थी से रेंई तक काम शुरू भी हो चुका है और बहुत जल्द किलाड़ और पुर्थी के बीच कई हिस्सों में एक साथ मशीनें गरजती दिखाई देंगी। इस पूरे रास्ते को चकाचक करने की जिम्मेदारी 108 आरसीसी कंपनी को सौंपी गई है। इस मौके पर आवासीय आयुक्त पांगी अमनदीप, बीडीओ योगेश और वन मंडल अधिकारी रवि गुलेरिया भी मौजूद रहे।

46 साल का वनवास होगा खत्म

बातचीत के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी शिव नाथ शर्मा ने घाटी के पुराने दर्द को बयां किया। उन्होंने बताया कि साल 1978 में उदयपुर से संसारी नाला के लिए सड़क निर्माण (Road Construction) का काम शुरू हुआ था। लेकिन बड़े अफ़सोस की बात है कि 46 साल बीत जाने के बाद भी 100 किलोमीटर का यह हिस्सा पूरी तरह से पक्का नहीं हो पाया है। आज भी मणग्रां से तिंदी और पुर्थी से किलाड़ तक का रास्ता सिंगल और कच्चा है, जिससे सफर जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है। लोगों ने चीफ इंजीनियर से आग्रह किया है कि इन रास्तों को जल्द से जल्द डबल लेन (Double Lane Road) में बदला जाए, ताकि पांगी का विकास सही मायने में हो सके।

आपदा में देवदूत बना बीआरओ

हालांकि, लोगों ने शिकायतों के साथ-साथ बीआरओ के काम की खुलकर तारीफ भी की। स्थानीय निवासियों ने दीपक प्रोजेक्ट (Deepak Project) के तहत किए गए कार्यों के लिए चीफ इंजीनियर का आभार जताया। लोगों ने याद किया कि कैसे आपदा के दौरान जब सिद्ध मंदिर नाला, महालू नाला और धरवास पुल बुरी तरह टूट गए थे, तब सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organization) ने दिन-रात एक कर दिया था। जो काम महीनों में होना था, उसे बीआरओ की टीम ने महज 15 दिनों में पूरा करके मुख्य सड़क को बहाल कर दिया था। अब उम्मीद है कि पक्की सड़क का सपना भी जल्द सच होगा।

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