मेरी पांगी

Chamba Pangi News || पांगी वा​सियों की मान्यता अनुसार आज के बाद पांगी के सभी मंदिरों के कपटा बंद, ठंठ के प्रकोप में दैत्य राज

Chamba Pangi News ||  पांगी: जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी के मंदिरों के कपाट विशेष पूजा के बाद बंद हो गए। मान्यता है कि  मकर संक्रांति को समस्त पांगी के लोग मंदिरों में जाकर अंतिम पूजा पाठ करने के बाद बैशाखी तक मंदिरों के कपाट बंद कर देते हैं। इस बीच में मंदिर नहीं […]
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Chamba Pangi News ||  पांगी: जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी के मंदिरों के कपाट विशेष पूजा के बाद बंद हो गए। मान्यता है कि  मकर संक्रांति को समस्त पांगी के लोग मंदिरों में जाकर अंतिम पूजा पाठ करने के बाद बैशाखी तक मंदिरों के कपाट बंद कर देते हैं। इस बीच में मंदिर नहीं खुलते हैं। इसके बाद घाटी में राक्षस राज हो जाता है, जिसके चलते लोग दिन ढलने के बाद अकेले घर से बाहर नहीं जाते हैं। मकर संक्रांति का दिन पांगी के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है।

बुजुर्गो का कहना है इसके बाद ठंड का प्रकोप और बढ़ जाता है, जबकि, अन्य स्थानों पर लोहड़ी के बाद ठंड का प्रकोप कम हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन शीतराजा , जिनको भगवान शिव का रूप माना जाता है। कैलाश पर्वत से चंद्रभागा नदी में प्रवेश करते हैं, जो कि एक माह तक वहां रहने के बाद फाल्गुन मास की संक्रांति को वापस अपने स्थान कैलाश पर्वत पर जाते हैं। मकर संक्रांति के बाद माघ मास की पूर्ण मासी को पांगी में चजगी यानि खौल  का त्योहार मनाया जाता है।

पूर्णमासी के बाद आने वाली अमावस्या को जुकारु का त्योहार मनाया जाता है। बताते हैं कि शीतराजा चंद्रभागा में जब प्रवेश करता है तो समस्त पांगी में दैत्य राज हो जाता है। मात्र घर देवता ही लोगों की रक्षा करते हैं। पांगी में तमाम मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं। बैसाखी से लोहड़ी, मकर संक्रांति तक मिधल माता, पुर्थी में मालासनी, लुज का शीतला माता मंदिर मकर संक्रांति तक नौ माह तक खुले तथा तीन महीने बंद रहते हैं। 

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