Himachal local News: क्या हिमाचल में बंद हो जाएगी OPS? सुक्खू सरकार के सामने खड़ा हुआ 50 हजार करोड़ का पहाड़ जैसा संकट
Himachal local News: शिमला: हिमाचल प्रदेश की सत्ता संभाल रही सुक्खू सरकार एक बहुत ही गंभीर आर्थिक भंवर में फंस गई है, जहाँ से आगे बढ़ने का रास्ता फिलहाल केवल केंद्र की मदद पर टिका है । हिमाचल में फाइनेंशियल इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं। इसका सबसे बड़ा असर राज्य के कर्मचारियों पर पड़ सकता है। सरकार को अब सैलरी, पेंशन, डीए और एरियर देने में बहुत दिक्कत होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार जल्द ओपीएस (OPS) को बंद कर सकती है। हलांकि सीएम की ओर से इस पर कोई संकेत नहीं दिए गए है। वहीं नौकरियां पहले ही कम मिल रही थीं, अब उन पर भी पूरी तरह से रोक लग सकती है। नई या पुरानी भर्ती अब लगभग ठप होने की कगार पर हिमाचल में होने जा रही है।
इसके बाद सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए जनता पर टैक्स का भारी बोझ डालना पड़ेगा। आने वाले दिनों में शराब, डीजल, पेट्रोल और बिजली जैसी चीजों पर टैक्स बढ़ाया जा सकता है। हिमाचल को इस संकट से उबारने के लिए अब भारी-भरकम लोन लेना होगा, क्योंकि अगर कर्ज नहीं लिया तो विकास की गाड़ी को चलना प्रदेश सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा। वहीं अब हिमाचल सरकार के पास एक यही विकल्प बचा है कि वह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा देने की ओर सोच रहे है। फिलहाल आज सीएम सुक्खू इस वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हुए है। वहां पर केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत कर सकते है।
वहीं वित्त विभाग ने भी हिमाचल में सभी तरह की सब्सिडी बंद करने की सलाह दी है। सलाह दी गई है कि दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त किया जाए और कुछ सरकारी संस्थान बंद किए जाएं। बिजली-पानी पर मिलने वाली राहत भी अब छीनी जा सकती है। एंकर ने एक चौंकाने वाला तथ्य बताया कि अगर साल 2026-27 में सरकार सभी सब्सिडी बंद कर दे और विकास कार्यों पर ‘जीरो’ खर्च करे, तब भी राज्य का कुल खर्च 48,000 करोड़ रुपये रहेगा, जबकि कुल आमदनी केवल 42,000 करोड़ रुपये ही होगी।
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल के बजट का एक बड़ा हिस्सा केवल सैलरी, पेंशन और कर्ज का ब्याज चुकाने में खत्म हो जाता है। आज प्रदेश का ‘डेट टू जीएसडीपी’ (Debt-to-GSDP) रेशियो 40% तक पहुँच गया है। स्थिति यह है कि अगले वित्त वर्ष में राज्य को 10,000 करोड़ का लोन मिलेगा, लेकिन पुराने कर्ज की किश्तें चुकाने में ही 13,000 करोड़ खर्च हो जाएंगे। इस संकट से निकलने के लिए सुक्खू सरकार को अब केंद्र से बड़े आर्थिक पैकेज की दरकार है।
आरडीजी समाप्त होने के बावजूद ओपीएस और अन्य कल्याणकारी योजनाएं रहेंगी जारी: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त करने के बावजूद राज्य सरकार की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जनता के अधिकारों और हितों की हर हाल में रक्षा करेगी। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में होती, तो ओपीएस को हटाकर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू कर दी जाती, जिससे सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से आने के कारण वे आम लोगों की परेशानियों को भली-भांति समझते हैं और उनकी सरकार कभी भी जनहित से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन भले ही वित्त विभाग देखता हो, लेकिन सरकार का मुख्य उद्देश्य संसाधनों को मजबूत करना और विकास को गति देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष, 2018 से 2021 तक जय राम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और फिजूल खर्ची के कारण आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य को लगभग 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में मिले, लेकिन इनका उपयोग पूंजीगत विकास के बजाय ठेकेदारों को खुश करने में किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 1,000 करोड़ रुपये ऐसी इमारतों पर खर्च किए गए जो आज खाली पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी प्राप्त हुए हैं, फिर भी राज्य सरकार ने सख्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 26,683 करोड़ रुपये अपने संसाधनों से जुटाए हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा से जनता को गुमराह करने के बजाय केंद्र सरकार से राज्य के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाला आरडीजी राज्यों के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के बजट पर गंभीर असर डालेगा। उन्होंने आरडीजी समाप्त किए जाने को प्रदेश के प्रति केंद्र सरकार का ‘सौतेला व्यवहार’ बताया और कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल प्रदेश एक राजस्व घाटा राज्य बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि वे आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे और राज्य के हक के लिए हर मंच पर लड़ाई लड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष द्वारा भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बैठक में शामिल न होने का फैसला किया। मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल प्रदेश के हित और जनता के कल्याण के लिए एकजुट होने की अपील की।
